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Corona virus has shown : Trees are indispensable

Trees are indispensable to humans

धर्म दीक्षा- मानव जीवन यात्रा का अभिन्न अंग- पेड़


वैज्ञानिक सोच रखने वाले हमारे ऋषि मुनि एवं पूर्वजों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए धर्म को हमारी दिनचर्या के साथ जोड़ दिया था। उन्हें मालूम था कि यदि किसी चीज को बचाना है तो उसको धर्म से जोड़कर हम पीढ़ी दर पीढ़ी एक संदेश पहुंचा सकते हैं। यही कारण है कि उन्होंने नदियों को मां की संज्ञा देकर उनकी पूजा,वंदना, आरती की परंपरा का आवाहन किया। वृक्ष जो हमारे प्राण के आधार हैं, विशेषत: भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन देने वाले वृक्षों को जल से सींचना, उनकी परिक्रमा करना, एवं उनके काटने पर पाप का भागीदार बनना, यह सब बातें  हमें शुरू से ही हमारे बड़े समझाते आए हैं। पंच पल्लव वृक्ष वट, पीपल, आम अशोक और गुलर को लगाना, एवं इन वृक्षों की पूजा करना, युगो से इस परंपरा का प्रतिपादन ऋषि-मुनियों ने किया है । इन सब धारणाओं के पीछे एक बहुत बड़ी वैज्ञानिक सोच है।जन्म के बाद से मृत्यु पर्यंत व्यक्ति भरपूर पेड़ों का उपयोग करता है किंतु वह कितने पेड़ जीवन में लगाता है ,यदि इसका हिसाब किया जाए तो शायद एक भी दिन जीने के हकदार नहीं है ।जिन पेड़ों से हम ऑक्सीजन लेते हैं अपनी प्राणशक्ति जहां से पाते हैं, क्या उनके स्वास्थ्य के लिए हमें सोचना नहीं चाहिए। हर व्यक्ति अगर एक पौधा गोद ले ले और उसको पानी दे तो शायद उसे ऑक्सीजन के लिए कभी मजबूर ना होना पड़ेगा , कभीअसहाय ना होगा वह। क्योंकि प्रकृति का नियम है, कर्म का सिद्धांत कहता है कि जो दोगे वही वापस पाओगे।आज करोना महामारी फैलने से सब ओर ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मचा है,ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी होने पर कालाबाजारी शुरू हो गई। वह हवा, वह ऑक्सीजन जो प्रकृति में हमें सहज में ही उपलब्ध कराई थी, आज उसी के लिए हम तरस रहे हैं एक दूसरे को मार रहे हैं। पेड़ों का इस हद तक कटान जारी है चाहे हाईवे बनाने के लिए हो या घर बनाने के लिए कि आज श्मशान घाट में भी लकड़ी की कमी महसूस होने लगी है। जिस गति से पेड़ों का कटान हो रहा है उस गति से उनका रोपण नहीं हो रहा। हाल ही में बहुत सी जगह पर करोना पीड़ितों के शव जलाने के लिए पर्याप्त लकड़ी उपलब्ध नहीं हो पाई, ऐसा हमने समाचार पत्रों के माध्यम से जाना।मैंने खुद भी कनखल में श्मशान घाट पर जाकर देखा कि जो दाह संस्कार के लिए जगह चिन्हित है वहां पर कोई चिता अभी जल रही है, किसी की राख ठंडा होने का इंतजार कर रही हैं इसलिए अपनी क्षमता से ज्यादा शव आ जाने पर श्मशान घाट में खाली जगह पर शवों को जलाया जा रहा है। और उस अग्नि के ताप से जो पास के बड़े-बड़े पीपल और वट वृक्ष है, वह तीन चौथाई झुलस चुके हैं।
कहते हैं बिना खाने के व्यक्ति 3 हफ्ते जिंदा रह सकता है, बिना पानी के 3 दिन किंतु बिना हवा के 3 मिनट भी व्यक्ति जिंदा नहीं रह सकता। हर व्यक्ति की जरूरत रोजाना 550 लीटर ऑक्सीजन हैवैज्ञानिकों के अनुसार 550 लीटर ऑक्सीजन लेने के लिए हमें 11000 लेटर हवा रोज मिले तभी यह पूर्ति हो सकती है। शुद्ध हवा में 19.5 परसेंट ऑक्सीजन की मात्रा होती है। यदि यह पूर्ति ना हो तो व्यक्ति को घुटन महसूस होने लगती है जैसा कि आजकल किसी भी बड़े शहर में एक आम आदमी अनुभव कर रहा है। एयर कंडीशनर के प्रयोग से यह स्थिति और भी खराब हुई है ।बहुत बार ऐसे कैसे सामने आए हैं जब बच्चे को कार में सोने के लिए छोड़ दिया ऐसे ऑन कर और कुछ घंटे बाद में बच्चा मृत मिला।घरों में भी लोग ऐसी लगाने पर खिड़कियां बंद रखते हैं और जब खुली हवा नहीं आती, ऑक्सीजन नहीं मिलते तो व्यक्ति के फेफड़े कमजोर होना लगते हैं। हमारे शरीर में कैंसर सेल्स भी तभी बढ़ने लगते हैं जब उनको  ऑक्सीजन की कमी होती है। इसलिए बैंक में पैसे बढ़ाने के साथ-साथ ऑक्सीजन बैंक अपने पर्यावरण में बढ़ाएं । समय रहते ऑक्सीजन बैंक बढ़ा ले ताकि  उसका मोहताज ना होना पड़े।जितना हो सके अपने आसपास पेड़ पौधे लगाए।आप फ्लैट में रहते हैं तो गमलों में लगाए, पास मैं कोई पार्क है तो उसमें लगाएं ।जहां भी कच्ची जगह दिखे वहां पर पेड़ लगाएं पीपल, नीम व्ट वृक्ष, या इनडोर प्लांट्स अपने घर में लगाए। पेड़ कोई अपने पास ऑक्सीजन नहीं रखेगा वह तो बांटेगा ही।ends

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