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Safarnama- Bhartiyata ki khoj mein-#Dubai Yoga


Memoirs of 2nd Yoga Festival

दूसरा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस

वर्ल्ड ट्रेड सैंटर पर

पहली बार तो पतंजलि योगपीठ में कार्यरत होने के नाते दुबई अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर लैक्चर देने का मौका मिला । फिर दूसरी बार खुद योग गुरू स्वामी रामदेव को दुबई में भारतीय दूतावास के निमंत्रण और समन्वय में माध्यम बन मुझे उसी दुबई में जो कुछ बाकी भौतिक इच्छाएँ रह गई थीं उन्हें पूरा करने का मौका मिला। जिन जगहों से गुजरी थी और जो लैंडमार्क छूट गए थे उन्हें अब भगवान ने अलग अलग दूतों के माध्यम से पूरा करवा तृप्त कर दिया । यह अलग अलग दूत थे – गौरव गरोवर, गिरीश पंत, सजीव पुरूषोत्तमम और जनम टी वी टीम। हां, चल सभी उसी परवरदिगार के इशारे पर रहे थे । इन सबको मुझसे हरिद्वार में किसी न किसी रूप में मिलाया गया था। योग वाकई जोड़ देता है- संसाधनों से, ख्याति से, स्वास्थय से और अपने अंदर छिपे उस परम सत्ता से। मेरे पापा वैसे घूमने को कभी अनुमति नहीं देते, हाँ, ड्यूटी और कार्य के रुप में मुझे 4 दिन की अनुमति मिल गई। योग दिवस के कारण स्वामी जी का शैड्यूल अत्यंत टाईट था। वे तो चारटर्ड फ्लाईट द्वारा कुल पाँच घ्ंटों के लिए ही दुबई आए, पर मुझे एक दिन पहले पहुँच कुछ अधिक ज्ञान अर्जन और अपनी बाकी रह गई इच्छाओं को पूरा करने की व्यवस्था प्रभु ने की

एटलांटिस होटल के एक्वेरियम के बाहर
दुबई माल के पास अैडरैस होटल के बाहर सफारी जिप्सी का इंतजार करते हुए,

वर्ल्ड ट्रेड सैंटर पर तैयारियाँ

मैंने अपने आधे घंटे का वक्तव्य का वृत्तांत कानसल जनरल आफिस को भेजा हुआ था पर किन्हीं कारणों से वह 17 जून को नहीं हो पाया। 18 जून को योग दिवस मनाया जाना था दुबई के शेख जायद रोड पर स्थित इस वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में। मुझे बताया गया था कि  17 को सब लोग व्यवस्थाओं में रहेंगे इसलिए 16 जून लैक्चर के लिए उचित है। निर्जला एकादशी कुछ वर्षों से रखती आई हूँ । नियम तोड़ने को मन नहीं किया। मैंने सिग्नेचर इंवैटस के डायरैक्टर सुनील गरोवर जी से कहा कि रमादान का पाक महीना है और मेरा भी एकादशी उपवास , 16 के बजाय 17 को ही लैक्चर रख दीजिए। उन्होंने न तो नहीं की पर असमंजस में पड़ गए। 17 शाम जब हम कानुसुलेट आफिस की कार में वर्ल्ड ट्रेड सैंटर पहुंचे तो वहाँ सबको पसीने में नहाते देख मैंने खुद ही अपना विचार बदल लिया। बहुत बडा़ हाल जिसमें 25000 लोग समा सकते थे , वहाँ कुछ 700 वालंटियर जमा थें। कानसल जनरल सर अनुराग भूषण भी तैयारियों का जायजा लेते नजर आए। ए सी नहीं चल रहा था,  वह अगले दिन ही चलाया जाएगा जब इवैंट है,  उससे पहले वहाँ के कमर्शियल आयोजक तैयारी करने के लिए आपको यह सहयोग नहीं देगे, ऐसा मालूम चला। आखिरी समय में प्रोग्राम भारतीय वाणिज्य दूतावास से दुबई सरकार के शेख राशिद बिन सईद आल मखदूम के माध्यम से होना तय हो गया । इससे पत्राचार का काम बहुत ज्यादा बढ़ गया था। उन  अरबीयों को योग के बारे में बताना मेरे लिए एक टेढ़ी खीर था। यूसुफ जो मुझे फोन अैर ईमेल पर रामदेव जी के 2 घंटे के प्रोग्राम की विवरणिका मांग रहा था उसे मैं कैसे समझाती कि हिंन्दुस्तान के संत किसी प्लैन के मुताबिक नहीं अपितु अपनी अंतर आत्मा की  आवाज पर व्याख्यान देते। आँख बंद कर वे जब मानव मन, शरीर और योग पर बोलते तो 2 घंटे कैसे निकल जाते महसूस नहीं होता। बीच बीच में हर योग मुद्रा और आसन का मर्म भी समझाते रहते । इधर मेरी दुविधा बढ़ गई थी। रामदेव जी का फोन नंबर तो किसी विरले को ही मिलता और उनके पी ए सुधीर भैया क्यों कर मेरा फोन उठाते, आखिर उनकी नजर में मैं एक मुलाजिम ठहरी। खैर इन सब बातों पर चर्चा करने का कोई औचित्य नहीं। मैंने खुद दो बार स्वामी रामदेव से पंतजलि जाकर प्रोग्राम की डिटेल पूछ उन्हें ईमेल पर भेजा पर 15 जून तक भी, मुख्य कार्यक्रम से दो दिवस पहले तक उनके सवाल जवाब चलते रहे। इधर सुधीर दहिया भी अपनी डिमांड 2 दिन पहले ही पूरी किए कि देा व्यक्ति चारटर्ड फ्लाईट में और जाएंगे। कोई भी किसी पर गुस्सा नहीं दिखा सकता था पर हालत आयोजकों और इस खुदा की बंदी की बुरी ही थी।

योगा मैट पर योग गुरू रामदेव के हस्ताक्षर के बाद दुबई के स्पोर्टस काऊंसल के प्रेसीडेंट सईद हरीब हस्ताक्षर करते हुए
वर्ल्ड ट्रेड सैंटर में,

जनम टी वी

17 की शाम ही जनम टी वी जो दक्षिण भारत का दुबई स्थित मलयालम चैनल था उनसे मुलाकात हुई। उन्होंने उसी स्टेज पर जहाँ रामदेव जी ने कार्यक्रम करना था, वहाँ 15 मिनट का अपने नमस्ते इंडिया  प्रोग्राम के लिए मेरा शूट लिया। बीजेपी, आर्ट आफ लिविंग, भरत योगा- तमाम एन जी ओ और योगा टीचर्स इस इवैंट को सफल बनाने के लिए हर एक को फोन पर काल कर आमंत्रण दे रहे थे। इस बार पक्के इरादे से गई कि बुर्ज खलीफा, म्यूजिकल फाऊंटेन, डेजर्ट सफारी सभी कुछ देखना है। तो 17 की शाम बारी थी म्यूजिकल फाऊंटेन की।

स्ंगीत पर थिरकता पानी का फव्वारा

दुनिया का सबसे बड़ा कोरियोग्राफड फाऊंटेन सिस्टम आदमी द्वारा बनाई गई बुर्ज खलीफा लेक पर है डाऊनटाऊन दुबई के मध्य स्थित है। यह कैलिफोर्निया की एक कम्पनी द्वारा बनाया गया है। 6600 लाईट, 25 रंगीन प्रोजैक्टर द्वारा यह पानी को 275 मी0 ऊँचाई तक फेंकता है। 500फीट तक ऊँचा जाकर एक दम नीचे गिरना और या हबीबीएक अरबी गाने की धुन पर इतना मनमोहक लगा मानों जन्नत की एक झलख दिखी। गिरीश पंत जो एक एन जी ओ चलाते हैं उनकी एक बार मैंने खबर बनाई थी कि कैसे उन्होंने ऋषिकेश के प्रवीण नामक व्यक्ति की मदद की उस अरबी देश में। ऐसे बहुत से भारतीय मजदूरों की वह मदद कर चुका था जो मिडल ईस्ट जाकर भारत नहीं लौट पाते हैं किन्हीं कानूनों की वजह से। गिरीश अपने देास्त सजीव की गाडी़ में  हम तीन लोगों को दुबई माल के पास यह म्यूजिकल फाउंटेन दिखाने ले गया था। लगभग 25 गानों के समूह में एक के बाद एक बजते हैं जिस पर पानी थिरकता है। हमारे पहंचने पर तीन गाने हम सुन पाए। पहला शो सामा दुबई शेख मुहम्मद के प्रति श्रद्धांजलि है। शिक शाक शोकअरबी गाना धूम थानाहिंदी गाना अभिजीत द्वारा, फुरत कद्दौरी की इश्तार काव्य, बिजान मोरताजवी द्वारा विश्व प्रसिद्ध गानों का कलैक्शन है। एक कार्य तो पूरा हो गया। दूसरा था बुर्ज खलीफा की सबसी ऊँची चोटी पर जाना। गिरीश कहने लगा कि एक बीजेपी नेता का घर 127 वीं मंजिल पर है। अगर वो दुबई में हो तो हम जा सकते हैं स्कियोरिटी गार्ड को कह कि उसके यहाँ जा रहे वरना 500 दिरहम खर्च करने होते जो हम में से कोई भी नहीं चाहता था। वैसे स्वामी रामदेव को भी बुर्ज खलीफा ले जाने का प्रोग्राम था परन्तु कुछ दिल्ली के शख्स जो खुद को अनुराग भूषण सर का दांया हाथ बता रहें थे वे यही कह रहें थे कि शेख ने अनुमति नहीं दी है। इस तरह कुछ समंजस की स्थिति बनी थी।

दुनिया का सबसे बेहतरीन म्यूजिकल फाऊंटेन शो जो हर रात बुर्ज खलीफा लेक पर दिखाया जाता

18 जून 2016 Dubai yoga

आखिर आ ही गया वह दिन जिसके लिए कई महीनों से बात चीत, प्लैनिंग, प्रार्थना , आयोजन चल रहा था। मैं और कुछ मीडिया साथी दुबई एयरपोर्ट पर स्वामी जी को रिसीव कर  हर क्षण कैमरे में कैद करना चाहते थे ताकि बढ़िया खबर बनाई जा सके किंतु एयरपोर्ट का संभव नहीं हुआ। बहर हाल कानसुलेट आफिस से 4 बजे कार आई लेने के लिए जिसमें दो अरब व्यक्ति कैमरा मैन भी थे। मैं कुछ जानकारी जुटाने में लगी थी उनसे और अंत में यही पायाए कि भारतीय हर चीज में अग्रणी है। यह दोनों व्यक्ति भी ऊपर बुर्ज खलीफा नहीं जा पाए। स्वामी जी के ग्रुप में जनम टीवी टीम, इंडिया टी वी और राधिका नागरथ ऊपर स्काई डैक तक पहुँच रामदेव जी से बातें कर न्यूज बना रही थी। भारत और भारतीयों पर प्रभु की विशेष कृपा है

 दुबई योगा- अतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर वर्ल्ड ट्रेड सैंटर में, स्वामी रामदेव के शिविर में भाग लेते हुए, जहाँ 110 से ज्यादा राष्टीªयता के लोग इक्ट्ठा हुए थे। दुबई टूरिजम के सीई ओ ईसाम काजिम के साथ वार्तालाप और फोटो एक जर्नलिस्ट महिला के साथ

बुर्ज खलीफा और योग की ऊँचाईयाँ

दुनिया का सबसे ऊँचा आबजरवेशन डेस्क 148 मंजिल, 555 मीटर पर । पैरिस के ईफल टावर से तीन गुना ऊँचा। दुनिया की सबसे ज्यादा मंजिलों वाला ऐलिवेटर जिसमें दुनिया का सबसे लंबा सफर तय होता। मैं इस की साक्षी बनी। यह अचंभा नहीं तो और क्या था मेरे लिए। पंजाबी में एक गाने की पंक्ति है-मैं नींवी मेरे सतगुरू ऊँचे, ऊचेयाँ नाल मैं लायी। बलिहारी ऐन्हां ऊंचेयाँ गुरूां तों, जिन्हां निवियाँ नाल निभाई। मैं कितनी भी नीची प्रकृति की रही हँू पर मेरे प्रभु जो ऊँचों से ऊँचे हैं, वो मेरा भी साथ निभाते हैं।

इमार प्रापर्टीस के सीई ओ ओ अमित जैन, योग गुरू स्वामी रामदेव जी,  कांऊसलेट जनरल सर अनुराग भूषण और मैं, स्वामी रामदेव जी के साथ बुर्ज खलीफा के लांज में

10 मीटर पर सैकंड की रफ्तार से चलने वाला ऐलिवेटर जिसमें हम 15-20 लोग सवार थे उस ऊँचाई तक जाने के लिए, अंधरे में हमें लेकर जा रहा था और सामने लगे डिस्पले पैनल पर फ्लोर इस तरह बढ़ रहे थे जैसे किसी स्टा़प क्लाक के अंक । उस अंधेरे में आडियो विडियो मोड में दुनिया के महत्वपूर्ण शहरों और उनकी इमारतों का दृश्य दिखाया जा रहा था, इंग्लैंड का बिग बैन,  सीयर्स टावर,  सबका जिक्र हुआ, जिन्हें मंैने भी देखा हुआ था।

148 वीं मंजिल पर

148 वीं मंजिल पर(At the top) पहुंच योग गुरू रामदेव के साथ बात हुई। फोटोग्राफी भी चल रही थी और मैं यह सब आंकडे और स्पीड और ऊँचाई के जोड तोड़ में लगी थी ताकि न्यूज ठीक से पहँच सके। मैंने स्वामी जी से अपने पेपर के लिए प्रश्न किया – दुनिया की सबसे ऊँची इमारत पर पहुँच कर कैसा लग रहा है। स्वामी जी बोले यहाँ ठंड है और अनुलोम विलोम प्राणायाम आसानी से किया जा सकता है। यह देश जहाँ आज से कई साल पहले तो धूल उडा़ करती थी और खाली झोपड़ियाँ देखने को मिलती थीं कई जगह आज दुनिया का सबसे ऊँचा इमारत है। मैं 9 साल पहले यहाँ आया था, तब से आज में काफी फर्क आ गया है जो यहाँ की समृद्धि और लोगों की मेहनत को दर्शाता है। अगर भारत भी इसी तरह प्रगति करे तो जंगल में मंगल कर सकता है।’

148 वीं मंजिल से ग्लास की दीवारों से 360° हम देख सकते थे। 125 वीं मंजिल तक ज्यादातर लोग जाते है। सब चीज का टिकट होता पर हमें भगवान ऐसा ही उड़ा ले जा रहे थे। अब इसके बाद शाम की मुख्य ईवैंट का था इंतजार। वर्ल्ड ट्रेड सैंटर में जहाँ 20000 लोग 100 राष्टीयता वाले इकट्ठे होने वाले थे “To witness the biggest yoga sensation ** जैसा कि वहाँ की गल्फ नियूज ने लिखा था।

वेा रेगिस्तान की पूर्णिमा का चाँद

पानी में राफ्टिंग और हवा में ग्लाईडिंग, पैरा ग्लाईडिंग, कयाकिंग तैराकी, या फिर स्नो पर स्कींग, यही मेरी समझ में स्पोर्टस एक्टिविटी थी। धरती पर रेत में भी ऐडवैंचर हो सकता है, यह न मालूम था। मीलों मील फैले रेगिस्तान में रेत के टीलों पर भी थिरका जा सकता है। डेजर्ट सफारी, वो भी पूर्णिमा की रात को, वहाँ के कलाकार द्वारा नृत्य और शाकाहारी भेाजन, जिसमें भारतीय व्यंजन खीर भी। शायद इससे ऊपर और कुछ चाह नहीं हो सकती थी मेरी दुबई में। गौरव गरोवर जो खून के रिश्ते नहीं दिल के रिश्ते से मेरा भाई बन गया अपने परिवार संग हमें सफारी पर ले गया।

कुछ लोग जुबान के पक्के होते हैं और अपने जीवन में प्यार और रिश्तों को पैसे के ऊपर मानते हैं। गौरव इसी भारतीय मिट्टी की खासियत की मिसाल है। हरिद्वार में एक मुलाकात में किया वायदा उसने बखूबी निभाया जबकि उसके साथी जिन्होंने जम कर कांसुलेट आफिस के दम पर ऐश उड़ाई, अपने वायदे की उन्हें याद भी नहीं आई।

खैर, हम लैंड क्रूज़र कार से उस प्वांइट पर पहुंचे जहाँ से सफारी शुरू होती है। वहाँ की एक दुकान में सिर पर बाँधने वाले हैड स्कार्फ जो अफगानी स्टाईल में बाँधे जाते हैं, मिल रहे थे। मैंने दाम पूछा तो वह बोला 25 दिरहम। बाप रे। मेरे हरिद्वार में तो यह 50 रू0 में मिल जाता और यहाँ 425- रू0 का एक अंगोछा नुमा स्कार्फ। गौरव ने कुछ मोल भाव कर सब 8 लोगों को स्कार्फ दिलाए। उसकी पत्नी, बेटियाँ और पत्नी के माँ बाप भी साथ में थे। पहले सफेद बंधवा, फिर मैंने लाल चैक वाला स्कार्फ चुना। हालांकि सफेद ज्यादा जम रहा था मेरी रंगों वाली कमीज के साथ पर यूनिफार्म की सफेद चुन्नी पहनते पहनते अब सफेद रंग  को फिर से सिर और गले को लपेटने का मन नहीं किया । मानो फिर से काम पर आ गई हूँ ।

ड्राइवर ने कार के पहियों की हवा निकाल उन्हें ‘डी फ्लेट’किया ताकि रेत के टीलों पर वह आसानी से फिसल न जाए। इंजन ही गाडी को खींच रहा था उन रेतीले टीलों पर और म्यूजिक फुल वाल्यूम था। मुझे आदर के साथ फ्रंट सीट दी गई। पीछे तीनों ने सीट बैल्ट लगाई और यूँ शुरू हुआ रेगिस्तान का सफर ।

ऐडरिनेलिन रश किसको कहते हैं जिसके लिए लोग ऐडवेंचर करते है, उस दिन मालूम हुआ। एकदम ऊँचाई से फिर तेजी से ढलान और फिर ऊँचाई, जाने कितने टीले पार किए। सभी क्रूज़र गाड़ियाँ आगे पीछे चलती हैं ताकि मुसीबत में एक दूसरे का साथ दे सकें। 4 बजे अैडरैस होटल की लाबी में हम सब इक्ट्ठा हो गए थे और 430 पर चले 530 बजे रेगिस्तान पहुँच गए थे। फिर आधा घंटा ऊपर नीचे रेत में उछल हम कैंप पहुँच गए थे जहाँ बहुत विस्तृत मैदान था । मैं हू हा करती, मजे लेती, चिल्ला रही थी पर पहुँचते ही उल्टी हो गई। हमें चलने से पहले हरी पालीथीन के लिफाफे दिए गए थे , चलिए वह काम आया। और सबकी तबीयत ठीक थी। पहुँचते ही बच्चे लोग डेजर्ट सफारी ऊँट से करने लगे, मैं तो उस विशाल मैदान में बाथरूम जाकर लेटने का ठिकाना ढूंढ रही थी। ड्राइवर ने एक लंबी टेबल के आस पास लगी गद्दियों की ओर इशारा किया और मैं चुपचाप नीले आसमान के नीचे लेट गई।

उस मरूभूमि में सैंड आर्ट से कृतियां बनाता केरल का एक युवक
पूर्णिमा के चांदनी के बीच नृत्य

सूरज ढल गया था, शाम को हवा ठंडी होने लगी। जून का महीना पर रेत ठंडी होती जा रही थी। फिर पूर्णिमा का चांद भी निकल आया और लाइटें आन हो गई। दो आकर्षण थे वहाँ- अफगानी डांस और सैंड आर्ट। यहाँ भी भारतीय कलाकार ही सर्वोपरि थे। ड्राइवर तो न अंग्रेजी जानते थे न हिंदी । बस अरबी भाषा ही उन्हें आती थी। मैं उत्सुकतावष उन सैंड आर्ट वालों को देखने लगी कि कैसे बनाते है रंगीली मिटृटी से डिजाईन ।गौरव ने IYD-Dubai &2016 और मेरा नाम लिखवा एक मैंमैंटो गिफ्ट करा।

सुई की नोंक से शीशी के अंदर नाम कुरेद, वह मिटृी भरता था और वेा ऊँट और रेगिस्तान का लैंडस्कैप बखूबी नजर आ रहा था शीशी में। जब तक हमने डांस देखा और खाना खाया, तब तक यह तैयार हो गया था।

एक शैड में पुरूषेंा का कंदूरा और औरतों का अबेया भी रखे थे जिन्हें हम बारी बारी पहन फोटो खिचवाने लगे। पूर्णिमा के चांद केा निहार एक अलग सी संतुष्टि और आनंद का अनुभव हो रहा था उस मरू भूमि में। दिल से सबको साधुवाद दे हम वापिस होटल की तरफ चले।

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