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Safarnama-Bhartiyata ki khoj mein

Chapter – 4 Memoirs of first International Yoga Day

अघ्याय 4

दुबई आमंत्रण

पहली जून की शाम को रैमेश टी आर का कान्सुलेट जनरल ऑफ़ इंडिया ( भारत के महावाणिज्य दूतावास ) दुबई से एक फोन आया मैं घर पर ही थी। उन्होंने कहा कि आपका इंटरनैट पर प्रोफाइल और मारिया विरथ के ब्लाग पर रिव्यू देखा। मारिया आपकी बहुत तारीफ कर रही थी। वो हमारी बहुत अच्छी दोस्त है टिवटर पर । क्या आप हमारे यहाँ दो दिन  सांइटिफिक बेसिज़ आफ योग पर  टाक शो देंगी। मैंने तुरंत हां बोल दिया। पापा ने भी दो दिन के लिए दुबई की अनुमति प्रदान कर दी। दस दिन के अंतराल पर दिन चिन्हित हो गए। उन्होंने उसी पल इन्विटेशन पत्र भेज दिया जिसमें लिखा था- “As per our telecom and confirmed, regarding this subject ( IYD ) matter, we would like to invite you officially as our guest of honour for a function related to “Dubai Yoga” on 11th– 12th June 2015. Speech of chief guest, Subject- “Scientific basis of Yoga.”

Amenities- Official guest of Indian consulate, Visa, Travel Itinerary, Accomodation and local transport.”

इंडियन कांउसल टू दुबई द्वारा मेरे वक्तव्य की घोषणा उनकी वैबसाईट पर, कांउसल जनरल का आभार पत्र
कांउसल जनरल का आभार पत्र
इंडियन कांउसल टू दुबई द्वारा मेरे वक्तव्य की घोषणा उनकी वैबसाईट पर,

सब कुछ जैसे अचंभा सा था। अभी तक बहुत सी यूनिवर्सिटी और संस्थाओं ने बुलाया था , परंतु इतनी इज्जत बख्शी न हुई थी। वीज़ा तो खुद ही लेना पड़ता था, बस इनविटेशन लैटर आ जाता था। यहाँ तो सब कुछ वो ही दे रहे थे। मैंने घर पर राघवेंदर से इल्तज़ा की कि वह तीन दिन नौकरी में ओवर टाईम न कर, पापा का खाना आदि देखेगा, वह मान गया।

प्रभु की कृपा बरसती है, तो अंतहीन होती है। अगले दिन आफिस आकर मैंने अपना पासपोर्ट कापी स्कैन कर भेज दिया। शाम को बैठे बैठे याद आया कि वीज़ा के लिए तो मूल पासपोर्ट चाहिए, यह फोटोकापी या स्कैन कापी क्यों मांग रहे हैं । कुछ उथल पुथल मस्तिष्क में थी, पर यह सोचकर शांत हो गई कि मेरा क्या गया, वो देंगे तो चले जाएंगे। फिर सोचा, मुझ से गलती तो नहीं हुई शायद उन्होंने ओरिजिनल मांगा हो, खैर भगवान का नाम लेते हुए सो गई और अगले दिन आफिस आकर देखा कि वाकई पासपोर्ट की कापी ही मांगी गई थी। फिर दिल्ली में एक टैवल एजेंट से बात कर, मैंने जाना, कि कानसुलेट के हाथ में सब कुछ होता है, वे ई विज़ा भी दे सकते हैं। कुछ चैन पड़ी । अब इंतजार होने लगा।

तीन दिन बिल्कुल चुप्पी के बीते। मैंने एक बार ई मेल पर पूछा कि क्या मुझे अपने वक्तव्य का ऐबस्ट्रैक्ट यानि निचोड़ भेजना है तो उनका जवाब आया, नहीं । 7 जून को विजा भी आ गया। अब लगने लगा कि शायद जाना ही है। जब भी टिकट की बात पूछी तो जवाब मिला, जल्दी ही मिल जाएगा। और 9 तारीख तक कुछ पता नहीं था कि खुदा की यह बंदी की फ्लाइट कितने बजे जाएगी। हद तो तब हो गई जब 9 तारीख को पूछने पर पता चला कि उन्होंने तो केवल दिल्ली से दुबई का टिकट बुक करवाया है। हरिद्वार से दिल्ली कैसे जाना है। पापा भी चिंता से ग्रसित हो मुझे बुरा भला कहने लगे। 10 तारीख रात की फ्लाइट में जाना यह मैसेज मोबाइल पर आया। टिकट अभी भी नहीं आया। प्रभु कैसी आपकी लीला। चंद धंटे बचे थे, इंतजाम करने के। सुनील पांडे जी से रिक्वैस्ट की। वे तुरंत रेलवे स्टेशन जाकर वी आई पी कोटा से टिकट करवा लाए, जन शताब्दी ट्रेन का, जो दिन में दिल्ली पहुँचती है। पर हुजूर, यह तो वेटिेग का टिकट है। जैसे ही मैंने उन्हें बताया, उन्होने फिर रेलवे स्टेशन जाकर डी आर एम के नाम एक चिटठी फैक्स करवा दी।  अब पापा को झूठ बोला कि टिकट वहाँ से आ गया है। और इस उघेड बुन में कि टिकट कन्फर्म कैसे होगा, फोन शुरू कर दिया सब तरफ। एक जवाब मिला कि रात को ही टिकट कन्फर्म होगा, उस परवरदिगार पर सौंप कर पैकिंग कर सो गई।

सुबह कनफरमेशन मैसेज भी आ गया और फिर आफिस द्वारा ग्ज़ाइलो कार मुझे लेने आई। खुशी खुशी हम दिल्ली को रवाना हुए। शुरूआत तो अच्छी थी। थोड़ा अहंकार शायद किसी कोने में घर कर गया होगा। सरकारी मेहमान बनने चली, राधिका । एयरपोर्ट पर कान्सुलेट वाले लेने आएंगे। वाह! दिल्ली एयरपोर्ट पर जब शाम को पहुँची, तो ज़बरदस्त परीक्षा हुई।

सात बजे तक भी बोर्डिंग पास नहीं दिया जा रहा था क्योंकि मेरा टिकट स्टाफ आन लीव का भेजा गया था। जिन लोगों का पैसे वाला टिकट था वह दूसरे विमानो में ऐडजस्ट किए जा रहे थे क्योंकि एयर इंडिया ने बड़े बोइंग जो 245 सीटर होता है उसके बजाय छोटा 190 सीटर भेज दिया था। एयरलाईन 20 पैसेंजर आफ लोड कर रही थी। काउंटर पर बैठा व्यक्ति मुझे बार-बार यही कह रहा थे हमारे हाथ में नहीं है। आप वेट करिए, अगर सीट उपलब्घ होगी तो आपको दे दी जाएगी। जब दो तीन बार पूछने पह यही जवाब मिला तो हताशा हुई। इसी बीच हरिद्वार से एक एसएमएस आया जो पतंजलि का डिस्ट्रीबयूटर था। वह दुबई से हरिद्वार पहुँचा था और उसे कानसूलेट ने मेरा लैक्चर सुनने का आमंत्रण भेजा था। वह अपना नाम वहाँ लोगों में बुलवाना चाहता था मार्किटिंग हेतु और इसीलिए मुझसे सम्पर्क कर रहा था। उस का फोन भी आया तो मैंने हां तो कह दिया लेकिन साथ ही यह भी बताया कि अभी तो कोई आशा की किरन दिखाई नहीं दे रही थी कि मैं दुबई जा पाऊँ। उसने बोला एयर इंडिया है, जब तक हल्ला नहीं मचाओगे कुछ नहीं होगा। मैंने  उसकी प्रेरणा पाकर एयर लाइन के मैनेजर, एयर होस्टैस, इक्ज़ैकेटिव सबसे कहा। उन्होंने एक ही उत्तर दिया – अभी इंतजार करो। पापा को झूठ बोला कि बोर्डिंग पास मिल गया है। और प्यास से बेहाल मैंने दुबई फोन धुमाया। रमेशजी ने उठाया और कहा आप चिंता न करें, वो आपको बिठाएंगे।

15 मिनट बीते, एक घंटा प्लेन में जाने को रह गया तब मैंने दोबारा अपनी अर्जी लगाई लेकिन एयर लाईन से कोई सकारात्मक उत्तर नहीं मिला। बस मंत्र जपने लगी और पानी ढूँढ कर पीकर फिर दुबई फोन किया अब उन्होंने किसी दूसरे से बात कर मुझे कहा- आप परेशान न हो। यह लोग खुद आपको बुलाएंगे। आप बैठ कर आराम करें और दो मिनट के अंदर एयर इंडिया की दो सीनियर एयर होस्टैर्स आइं, मैनेजर भी आया, कोआरडिनेटर भी। सब मैडम नागरथ को आवाज़ देने लगे। दो ही मिनट में मुझे बोर्डिंग पास दे दिया गया बिजनैस क्लास का। वाह जी वाह। हमारी यात्रा शुरू हुई शाही अंदाज में। इकोनोमी से बिजनेस अपग्रेड। वाह प्रभु तेरी माया। फोटो खिंचवा अपने बाजु वाले पैसेंजर से बात की। वो दुबई में काम करता था एच आर मैनेजर के रूप में। बस सब जानकारी जुटाने लगी। मालूम चला कि बुर्ज खलीफा के लिए टिकट लगती है । जिसका रेट 500 दिरहैम तक होता है। मुझ से आकर्षित हो वह भी माइग्रेन के लिए योग आसन पूछने लगा। उड़ान शुरू हुई और मैं 12 बजे दुबई पहुँची। एयरपोर्ट पर कानसुलेट से एक गोरा सा आदमी जिसके गले में आई कार्ड था वह एक बोर्ड लेकर खड़ा मिला। उस ने इमिग्रेशन काउंटर पर फोटो खिचवा मेंरा बैगेज भी जल्दी दिलवा दिया। बस हम दोनों दस मिनट में एयरपोर्ट से बाहर रोड पर आ गए।

बाहर आए तो ठंड से राहत मिली। सब कुछ ए सी, जिसकी आदत नहीं है। आफिस में भी हर धंटे बाहर निकल खिड़की खोल सांस लेती रहती हूँ जैसे मछली पानी के बाहर निकल कर।  बाहर का तापमान शायद 45 डिग्री रहा होगा वहां का।

कानसुलेट से आए साहब के फोन से पापा को धंटी कर बताया था कि मैं पहुँच गई। गाड़ी में ससम्मान मुझे बिठाया गया। रास्तें में वहाँ की लोकल आबो हवा और इमारतों की जानकारी यह साहब मुझे देते गए। मुझे कार में बैठे बैठे ऊँची-ऊँची इमारतें जो दिख रही थी। उनके बारे मे वे बता रहा थे। अचानक दूर एक लंबी इमारत की बिंदु-बिंदु रोशनी दिखाई दी और मै कार के अंदर से ही उसे क्लिक किया। लेकिन नाकामयाब रही। मेरी उत्सुकता देख कान्सुलेट के साहब बोले, आप जहाँ रूकेंगी, उस होटल से केवल पांच मिनट की दूरी पर बुर्ज खलीफा हैं आप देख लीजिएगा। अरे वाह! बस और क्या चाहिए। मानो मेरी तमन्ना पूरी हो रही थी।

यू एस जाते हुए दुबई में दो बार ट्रांजिट में 2 घंटे बिताए थे। मेरे साथ के कई पैसेंजर्स इस मानवीय करिश्मे को देखने गए थें जब यह नया-नया बना था। 63 फ्लोर का यह टावर अपने में कई चीज़े समेटे है। शेख व मुहम्मद बिन, राशिद बूलेवार्ड में बना 2009 में ही पूर्ण होकर आवाम के लिए जनवरी में खोला गया था 2 पार्किंग लेवल है इस टावर में और दुनिया का सबसे ऊँचा टावर बन गया ( 1.5 मील से भी ज्यादा इसकी ऊँचाई है और यह मयूनिसिपल कारपोरेशन से नहीं जुड़ा है इसलिए इसका सारा वेस्ट ट्रक लोड हो शहर से बाहर जाता है। लेकिन सफाई की इंतहा कोई इस शहर से सीखें। अरमानी होटल इस टावर का सबसे प्रसिद्व है और लोग शापिंग माल में अक्सर जाते हैं। मुझे तो दूर से ही पसंद आया यह।

आफिशियल गैस्ट -सरकारी मेहमान

आफिशियल गैस्ट क्या होता है यह मुझे क्राउन प्लाज़ा होटल में जाकर पता चला। रात को भी इस होटल में इतनी आवाजाही थी कि होटल के आगे कारें लगातार आ कस्टमर छोड़ आगे बढ़ जाती थी, एक मिनट भी रूकने पर लाईन लग जाती थी। एलिवेटर से हम रिसैपशन पर आए। कान्सुलेट से आए  साहब ने बोेला तीन नाईट के लिए बुक है मैडम नागरथ का रूम। उन्होंने हामी भर साइन करवाने के लिए फार्म दिया और मेरा पासपोर्ट स्कैन किया। इतने में दूसरा व्यक्ति बोला अगर आप स्मोकिंग करते हैं तो हमें पहले बता दें, हमारे होटल पर जगह जगह स्मोक सैंसर लगे हंै। और आपको एक दिन का किराया अधिक चार्ज किया जाएगा। स्मोकिंग जोन में ही आप स्मोक करें। उसकी बात काट कान्सुलेट बोला यह चार्जिज़ होटल छोड़ने पर तय हो जाएंगे आप चाबी दीजिए।

मेरा सामान भी वहाँ आ गया था और मुझे इवैंट मैनेजर से मिलवाया जिनका नाम सुनील गरोवर था। उन्होंने बात-बात में एक पंजाबी का शब्द बोल दिया जिसे मैंने पंजाबी में उत्तर दिया। सब हंस पड़े। बस सब अपने ही लोग जान पड़े। मुझे गरोवर भाई साहब ने बताया कि कान्सुलेट का जो व्यक्ति मुझे लाया था वह उत्तराखंड का था। मैं खूब हंसी। अंग्रेजी के कारण अपने ही बेगाने हो गए थें। बस हिंदी में बात शुरू हो गई और थोड़ी देर में 16 वीं मंजिल पर आ गई अपने कमरे 1626 में। क्या ही सुंदर था वातावरण। । मुझे होटल वाले ने कहा यह फ्रिज़ में सभी ड्रिंक्स चाकलेट रखें हैं, टेबल पर फ्रूट ड्राईफ्रूट सब कांपलीमेंटरी था। चाय काफी का सब सामान, ओवन पूरा घर का समावेश था और खिड़की से नीचे बिंदु बिंदु रोशनी, अनगिनत कारों की लगातार कतार चलती हुई, दूर ऊँची बिल्डिंग की कतारें । बैड पर कुछ चीज़ देखकर मैं चौंक गई। एक गत्ते के डिब्बे पर लिखा था। This works: sleep.

Two bottles in washroom giving message – Hydrate your Mind

ऐरोमाथेरेपी यहाँ भी—

हरिद्धार के देवसंस्कृति विश्वविद्यालय से कई बार मुझे शोध विद्यार्थियों के ऐरोमाथेरेपी पर शोध पत्र प्राप्त हुए थे। जिनमें हवन में औषधियों के प्रयोग करने पर लोगों पर चिकित्सीय प्रभावों को साबित किया गया था। ज्यादातर मानसिक डिसआर्डरज़ (विकृतियों) के लिए ऐरोमाथैरेपी का इस्तेमाल किया जाता । बैड पर पड़ी उस छोटी सी डिब्बी को खोला, तो 2 छोटी शीशी थी, जिसमें कोई द्रव्य पदार्थ था। लिखा था  Þ 2 mini solutions for better night’s sleep” बहुत बढिया । यानि मंत्र जपकर मन को शांत कर योग निद्रा का दूसरा विकल्प- Award minning aromatherapy brand. This works and crowne plaza join together to launch sleep 2 mini solutions to help you unwind & relax.Clears the head and helps you breathe more easily with a blend of Frankincense and eucalyptus.

Deep calm pillow spray

A fusion of calming oils to relax and calm including lavender, Velivert and Camomile for adults only.

इसके साथ-साथ एक गुड नाइट की छोटी बुकलेट रखी थी ,जिसमें हर पेज़ पर चार लाइनें लिखी थीं। पहले पेज़ पर नींद की अहमियत, जैट लैग, टाईम ज़ोन चेंज पर लिखा था।

दूसरे पेज़ पर एक ब्रिटिश स्लीप एक्सपर्ट का व्यू लिखा था और होटल क्राउन प्लाज़ा के जनरल मैनेजर द्वारा स्वीट ड्रीमज़ का संदेश। कैसी खूब मार्किटिंग थी। मैनेजर ने लिखा था-Þ Working with Dr. Chris Idzikowski, former chairman of the British sleep society, we have created a sleeping environment with advanced bedding features designed to give you a real advantage when you rise to face the new day. That’s why Crowne Plaza has developed sleep. Advantage a unique programme which includes upgraded bedding and a range of complimentary extras. But you be the judge. Sweet dreams.

उनकी एक पंक्ति मुझे बहुत भायी- Breathe clearly tonight, think clearly tomorrow.

मैंने भी अपने लैक्चर में यही सांस प्रश्वास प्राणायाम द्वारा रोगों के निदान की बात करनी थी। ऐसा लगा दुनिया अब इस यौगिक सिद्धांत को मानती ही नहीं, अपनी दिनचर्या में भी अपनाने में लगी है। क्वाईट ज़ोन, मन को खाली करें, बाकी अपने आप हो जाएगा, सोने और खाने में दो घंटे का अंतर रखें, व्यायाम अच्छी नींद के लिए आवश्यक है- ऐसी बहुत बातें उस कार्ड नुमा बुकलेट मे लिखी थीं। जैट लैग से निपटने के भी आसान नुस्खे दिए गए थे। योग मय सारी प्रकृति नज़र आ रही थी।

अगली सुबह ठीक पांच बजे, दुबई के 630 बजे मेरी आंख खुली। मैंने पापा से बात करने का फोन के पास रखी निर्देशिका, जिसमें इंटरनेशनल काल करने की विधि लिखी गई थी, उसे समझा और भारत में फोन किया। इससे मुझे काफी राहत मिली कि पापा बिल्कुल शांत थे।

नहा कर ब्रेकफास्ट के लिए रेस्तरां पहुँची तो एक सरदार फैमली दिखी। उनकी बेटी से एक दो फोटो खिंचवा, थोड़ी गप शप कर, ब्रेक फास्ट के लिए मुआयना करने लगी। नटस के डोंगो से लेकर जूस के डिस्पैंसर, कम से कम छः किस्म, 15 किस्मों की बेकरी आईटम, साऊथ इंडियन इडली सांभर वड़ा, जाने क्या क्या। सवा घंटा ब्रेकफास्ट में ही लग गया क्योंकि मालूम था कि दिन भर का तो पता नहीं रहेगा कहाँ खाना, क्या खाना। पूरी आत्मा तृप्त कर मैं वापिस रूम पहुँचीं ।12 बजे मेरी कान्सुलेट जनरल से मीटिंग थी इसलिए सोचा थोड़ी फोटोग्राफी हो जाए। किसी भी फ्लोर पर कोई बाहर जाने का रास्ता नहीं मिल पा रहा था, जहाँ से खुली हवा और सड़क दिखें। रिसैप्शन से पूछने पर पता चला कि तीसरी मंजिल पर स्विमिंग पूल है जहाँ ताज़ी हवा मिलेगी। रूम की चाबी कार्ड ही सैंसर पर छुआ दो, तो पूल का दरवाजा खुल जाएगा। मैं कैमरा ले चली पूल की ओर। नहाना तो था नहीं बस फोटोग्राफी और थोड़ी सी ताज़ी हवा चाहिए। AC का temperature 30 से ऊपर हो ही नहीं सकता था, इसलिए मैं तो भीष्ण गर्मी के मौसम में भी रेगिस्तान मुल्क में भी ठिठुर कर रह गई थी। यहाँ सांस आई। पूल इनचार्ज को कैमरा थमा कुछ अपनी फोटो खिंचाई और नीचे सड़क के बीच हरियाली को देखा तो खूब अचंभा हुआ। हरी घास के मानो कारपैट बिछे हुए थे। कौन कहेगा कि यह रेगिस्तान था। पानी के स्प्रिंकलर सब जगह फिट थे जो स्वतः ही घास को हरा भरा रखते थे। समुद्र से पानी खींच, फिल्टर कर रेगिस्तान को भी हरित शहर बना डाला था यहाँ के शेख ने । होटल की अलग-अलग फ्लोर पर अलग-अलग क्लब थें। डांस क्लब, फिटनैस क्लब, जाने क्या-क्या। मैं तो योग के रंग में रंगी बस खुद को प्रभु से जोड़ने की कोशिश कर रही थी।

इतनी हरी भरी शेख ज़ाएदरोड
होटल क्राउन प्लासा की 16वीं मंजिल पर रहते हुए, तीसरी मंजिल पर स्विमंग पूल खेाजा

कान्सुलेट जनरल से मीटिंग

तारीख 11 june को शाम के लैक्चर से पहले मेरी मीटिंग रखी गई कान्सुलेट जनरल आफिस से फोन आया उन्होने कहा कि 1145 पर मेरे लिए कार भेजी जाएगी और फिर 12 मिनट का रास्ता है डिप्लोमैटिक एन्कलेव में जाने का। वहाँ वो मुझे ब्रीफिंग देंगे कि शाम को कैसे और क्या कहना है। 1215 तक गाड़ी का नामोनिशान नहीं था। मैं इस बीच में दो बार इवैंट मैनेजर से होटल के फोन से ही बात की कोशिश कर चुकी थी। फिर रमेशजी को मिलाया तो वे बोले, “Don’t worry please. You are our guest. It is our responsibility to bring you to CG office.” कोई चिंता नही करनी- आप हमारे मेहमान है। देखा जाए तो ज़िन्दगी में भी तो यही करना है। बार-बार मुझे योग का असली मायने समझाया जा रहा था। यह जानने पर कि रमेशजी आर एस एस के है और सोशल वर्कर हैं, मैं उनकी योगीमय स्थिति को समझ पाई।

खैर कुछ देर में सिल्वर पयैरो आ गई और मैं दुबई के रास्ते एक्सप्लोर करती सी जी आफिस पहुँची। परिंदा भी बिना इजाज़त उस एन्कलेव में फटक नहीं सकता था। सभी राजदूतावास इसी एन्कलेव में थे। पीछे पाकिस्तान का भी नज़र आया। वो लोग पहले से ही उत्सुक नज़र आए। दो तीन आफिस की एंट्री के बाद मुझे एक छोटे से कान्फ्रैंस रूम में बिठाया जहाँ भारत की कई सारी काफी टेबल बुक रखी थी। इवेंट मैनेजर राहुल आकर मुझे शाम के प्रोग्राम के बारे में बताने लगे। उनसे बात कर अपने सुझाव दे मैं सी जी के रूम की तरफ बढ़ीं उनके साथ फोटो हुआ। ड्राइवर को ही अपना कैमरा दिया था मैंने । वो फोटो काम आयी बाद में भी पत्राचार में। एक गौरव सा महसूस हो रहा था और अपनापन भी लग रहा था उन अजनबियों के बीच सी जी की कुर्सी के पीछे भारत का झंडा था। और आजु बाजु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का चित्र था। भारत के अंदर तो ऐसा मौका नहीं मिल पाया था, भारत के अंदर तो ऐसा मौका नहीं मिल पाया था, भारत से दूर अपने झंडे की आन और शान देखकर बहुत प्रफुल्लित थी । सच में मैं सरकारी मेहमान थी वहाँ, उन लोगो के हाव भाव से दृष्टिगोचर हुआ। सी जी अनुराग भूषण ने  21 तारीख को मेन इवैंट में आने के लिए न्योता दिया। साथ ही दुबई घूमने के लिए कार ड्राइवर भी व्यवस्थित करने को कहा। वाह रे प्रभु।

भौतिक इच्छाएं भी आप पूरी करते हो।  

काऊंसल जनरल अनुराग भूषण को अपनी पुस्तक भेंट करते हुए
काऊंसल जनरल की टीम के साथ

मैंगो फैस्टिवल और योग

कान्सुलेट आफिस का आडिटोरियम आम की विभिन्न किस्मों से महक रहा था। 100 से ज्यादा किस्में अलग-अलग टोकरियों में नाम सहित प्रदर्शित की गई थी। लूलू मैंगोज़ के बोर्ड हर तरफ लगाए गए थे। मैंगोज़ फ्राम टीपू सुल्तान पैलेस एक विशालकाय बोर्ड पूरे आडिटोरियम की पिछली दीवार पर किला की आकृति लगाया गया था जिसके आगे साईकिल गड़ढे, बैलगाड़ी पर आम ही आम लदे थे। पूरे हाल में गोल मेज़ों के आसपास कुर्सियाँ लगी थीं । आगे के दो मेज़ो पर डिप्लोमैटस टैग लगा था। यहाँ-विभिन्न राजदूतों ने आकर बैठना था। मैं भी उसी में एक कुर्सी पर बैठ गई। थोड़ी देर में डिप्लोमैटस आने लगे। मेरे बगल में ब्रिटिश अम्बैसी के एक कपल आकर बैठै।

आडिटोरियम की पिछली दीवार पर टीपू सुल्तान के महल के आकार की सजावट
आडिटोरियम में विभिन्न दूतावासों से आए मेहमान


मेरे सामने एक बड़ा चैलेंज था। आम और योग को लिंक करना, जोड़ना। जब इवैंट मैनेजर से मैने पूछा तो कि दोनों मे क्या ताल्लुक है तो बोले इसीलिए तो आपको बुलाया आप सोचिए और बताइए। मैने होटल में इंटरनैट पर थोड़ा आम सर्च करके, उसके स्वास्थ्य लाभ ढूँढ लिए थे जैसे कि आम शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। बस दोनों को जोड़ दिया कि योग भी हमें बीमारियों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने मे मदद करता है। वैसे भी आम भारत का राष्ट्रीय फल है। मैने उस गंभीर विषय “Scientific Basis of Yoga”  को कुछ हल्का रखने के लिए और आम जन में उसके प्रति रूचि बढ़ाने के लिए ईगल (गिद्ध) की पुनर्जीवन की कहानी भी कही।

मुझे बताया गया था कि ज्यादातर राजदूत 40 से 60 वर्ष में होंगे और कुछ रिटायर्ड लोग भी। जिन्हें लाइफ स्टाइल बिमारी अक्सर हो जाती हैं। हाई ब्लड प्रैशर को कैसे योगासन और प्राणायाम से दूर रखा जाए इसी विषय पर मैंने अपनी प्रेजंटेशन बनाई थी। सब की सहभागिता करवाने के लिए मंै स्टेज से उतर उन लोगों के बीच उनसे सवाल करती घूम रही थी ताकि यह एक पूर्णतया टाक शो लगे जो विदेशों में खूब प्रचलित है। प्रभु की कृपा से मेरी टाक के बाद सब लोग फोटो खिंचवाने के लिए आतुर दिखे। हमने खूब ग्रुप फोटो खींची आमों के साथ, आमों के बिना, आम तोडते हुए, टूटा हुआ आम, आम के पेड़ जो फ्लैक्स पर काट कर लगाए हुए थे, उनके साथ जोड़ते हुए। प्रेजंटेशन को कुछ हल्का रखने के लिए और आम जन में उसके प्रति रूचि बढ़ाने के लिए ईगल (गिद्ध) की पुनर्जीवन की कहानी भी कही। सबसे ज्यादा खुशी इस बात से मिली कि ब्रिटिश जोड़े ने आटिजम के बारे में मुझसे जानकारी चाही और पूछा कि क्या योग से मानसिक विकार को भी ठीक किया जा सकता है। उन्होंने यह भी पूछा कि कितने दिन में योग के रिजल्ट दिखने शुरू हो जाते है। 2 मिनट वाली अवेरनैस मैडिटेशन पर बहुत लोग उत्सुक नज़र आए। प्रभु का अनेकों बार धन्यवाद ज्ञापन किया फिर हम सब डिनर करने लगे। हर आईटम ड्रिंक से लेकर, मेन मील और स्वीट डिश में भी आम का टेस्ट था। सबमें आम समाहित था। जैसे फलों के इस राजा ने आज योग कर लिया हो उन सब मेहमानों से। सभी मेहमानों को वे आम बैगों मे घर लेजाने को दिए गए और मेरे लिए लूलू मैंगोज़ वाले ने स्पेशल टोकरी तैयार की जिसमें आधा-आधा किलो के आम भी थे। दुबई से मैं आम की सौगात लेकर धर आई।  उनके साथ जोड़ते हुए। सबसे ज्यादा खुशी इस बात से मिली कि ब्रिटिश जोड़े ने आटिजम के बारे में मुझसे जानकारी चाही और पूछा कि क्या योग से मानसिक विकार को भी ठीक किया जा सकता है। उन्होंने यह भी पूछा कि कितने दिन में योग के रिजल्ट दिखने शुरू हो जाते है। 2 मिनट वाली अवेरनैस मैडिटेशन पर बहुत लोग उत्सुक नज़र आए। प्रभु का अनेकां बार धन्यवाद ज्ञापन किया फिर हम सब डिनर करने लगे। हर आईटम डिंªक से लेकर, मेन मील और स्वीट डिश में भी आम का टेस्ट था। सबमें आम समाहित था। जैसे फलों के इस राजा ने आज योग कर लिया हो उन सब मेहमानों से। सभी मेहमानों को वे आम बैगों मे घर लेजाने को दिए गए और मेरे लिए लूलू मैंगोज़ वाले ने स्पेशल टोकरी तैयार की जिसमें आधा-आधा किलो के आम भी थे। दुबई से मैं आम की सौगात लेकर धर आई।  आम के पेड़ जो फ्लैक्स पर काट कर लगाए हुए थे, उनके साथ जोड़ते हुए। सबसे ज्यादा खुशी इस बात से मिली कि ब्रिटिश जोड़े ने आटिजम के बारे में मुझसे जानकारी चाही और पूछा कि क्या योग से मानसिक विकार को भी ठीक किया जा सकता है। उन्होंने यह भी पूछा कि कितने दिन में योग के रिजल्ट दिखने शुरू हो जाते है। 2 मिनट वाली अवेरनैस मैडिटेशन पर बहुत लोग उत्सुक नज़र आए। प्रभु का अनेकों बार धन्यवाद ज्ञापन किया फिर हम सब डिनर करने लगे। हर आईटम ड्रिंक से लेकर, मेन मील और स्वीट डिश में भी आम का टेस्ट था। सबमें आम समाहित था। जैसे फलों के इस राजा ने आज योग कर लिया हो उन सब मेहमानों से। सभी मेहमानों को वे आम बैगों मे घर लेजाने को दिए गए और मेरे लिए लूलू मैंगोज़ वाले ने स्पेशल टोकरी तैयार की जिसमें आधा-आधा किलो के आम भी थे। दुबई से मैं आम की सौगात लेकर धर आई।

अपने वक्तव्य के दौरान

दीन के उपदेश और दुबई भ्रमण

आपको मैं दुबई माल छोड़ दूंगा जहाँ आप घंटों बिता सकते हैं फिर 130 बजे दोबारा पिक कर और जगह का भ्रमण करवाऊँगा ऐसा आबिद ड्राइवर ने मुझे होटल से पिक करते हुए कहा। मुझे माल का नहीं प्राकृतिक सौंदर्य देखने का मन था लेकिन जब उसने कहा कि वह 1 बजे की जुमे की नमाज़ अदा करना चाहता है तो मैं मान गई। प्रभु के दर पर हाज़री से भला मैं उसको कैसे महरूम कर सकती थी। और दुबई माल वाकई दर्शनीय था। बहुत बड़ा सी एक्वैरियम जिसमें अंदर जाने के लिए टिकट था परंतु बाहर से ही शार्क, व्याइट फिन रे, ऐसी मछलियां घूमती फिरती नज़र आ रही थी। छत तक ऊँचा यह एक्वेरियम भी कुछ मीटर लंबा था।  चार अबेया ओढे युवतियां दिखी तो मैने उन्हें फोटो खिंचवाने को रिक्वैस्ट किया। उनमें से एक बोली कि उन्हें अनुमति नहीं थी। मुझे इस बात पर हैरानी भी हुई और दुख भी। फुल मेकअप में यह युवतियां देखने को अपने देश में मल्लिका की तरह रहती है परंतु कार नहीं चला सकती, मनचाहा पहन नहीं सकती, अपनी बात नहीं व्यक्त कर सकतीं मीडिया को और भी बहुत सी बंदिशे हैं। पराधीन सपनेहु सुख नाहीं। चाहे अपने राजतंत्र में यह राजा की तरह घूमते हैं परंतु मुझे ऐसा रईसीपन एक सोने के पिंजरे में कैद के समान प्रतीत हुआ। कुछ खरीदना तो था नहीं, बस घूम-घाम कर मैं फाऊंटेन के पास आ गई और बुर्ज खलीफा के आगे सैल्फी खींची। जैसे लन्डन आई से नीचे के लोग छोटे-छोटे दिखते वैसे ही यहाँ से और भी नन्हे दिखेंगे यह सोचकर 150 वीं मंजिल पर जाने का विचार नहीं किया। पैसे वैसे ही बचाकर मैं एक बजे बाहर आ गई।

बुर्ज आल अरब
दुबई भ्रमण में दुबई माल का एक्वैरियम,

बस अब हम पाम जुमैरा की तरफ चले। आबिद ने मुझे बताया कि हम समुद्र के नीचे चल रहे थे। वो इतनी लंबी सुरंग थी लेकिन ज़रा भी महसूस नहीं हो रहा था। वह बोला किसी भी समय यह सारा शहर पानी में डूब जाएगा, समुद्र इसे निगल जाएगा। हम पानी के ऊपर ही तो रहते हैं। यह शेख लोग समुद्र से पानी खींच, फिल्टर कर क्या-क्या नहीं कर रहे। पूरी रेंता समुद्र तल से उठा ऊपर डाल एक जुमैरा आईलैंड बना दिया जिस पर इतने बड़े और आलीशान विला हैं। शाहरूख खान का भी वहाँ विला था। समुद्र के किनारे बसे इस द्वीप पर हर घर को अपना प्राइवेट बीच दिया गया है। पैसा खर्चने की कोई इंतहा ही नहीं, जितना मर्ज़ी लुटा लों। तभी तो दुबई इतना तरक्की कर रहा है। वहाँ की राजतंत्र संरकार आवाम से टैक्स भी वसूल नहीं करती। उन्हें पैसे की ज़रूरत ही नहीं है। सब देशों के लोग आकर वहाँ निवेश करते है। वहां का प्रधान दूतावास एक भारतीय कल्चर सिटी बनाना चाह रहा है जिसका अपना एक आयुर्वेदिक हास्पिटल होगा और एक कल्चरल सैंटर । तो क्या चलें दुबई ।

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